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हंदवाडा की नाबालिग लडकी के वकील परवेज इमरोज के साथ साक्षात्कार भाग-1

हंदवाडा की नाबालिग लडकी के वकील परवेज इमरोज के साथ साक्षात्कार भाग-1

भाग 1 में परवेज इमरोज हंदवाडा की नाबालिग लडकी का प्रतिनिधत्व कर रहे हैं जिसका 12 अप्रैल को कथित रूप से बलात्कार हुआ । उन्होंने उस लडकी की मौजूदा  स्थिति के  बारे में जानकारी दी और बताया कि उनके अनुसार सरकार को किस प्रकार की कारवाई करनी चाहिए । भाग 2 में मानवाधिकार अधिवक्ता ने इस बात पर चर्चा की है कि कश्‍मीर में हो रहे टकराव के व्यापक प्रसंग किस प्रकार से भूमिका निभा कर रहे हैं ।

सुशील कम्बंपाटि : क्या यह पूरी तरह से पुलिस का मामला बनता है ?

परवेज इमरोज : पुलिस अपने आप से कोई कारवाई नहीं करती । उनको निर्देशित करने वाली दूसरी ताकते हैं और हमें लगता है कि सेना भी इसमें शामिल है । सरकारी तथा गैर सरकारी कर्त्ताओं के साथ होने वाली विभिन्न प्रकार की बातचीत से इसकी पुष्टि होती है ।

एस.के : क्या कश्‍मीर की विशेष प्रकार की परिस्थितियां प्राधिकारियों को इस प्रकार के विधि पूर्वक काम करने की अनुमति देती हैं ?

पी.आई. : पुलिस और दूसरे जो भी इस मामले में शामिल हैं, उन सब ने जे.के. कानून व्यवस्था की धज्जियां उडाई हैं । नाबालिग लडकी को गिरफ़्तार करके उसे परेशान करना, अन्यथा दबाव डाल कर विडियो में उसके ब्यान दर्ज करना और उसे हवालात में बंद करना, ऐसा करके उन्होंने जे.के. कानून व्यवस्था की धज्जियां उडा दी हैं । कानून व्यवस्था की खुल्लमखुल्ला उपेक्षा यद्य्पि अत्याधिक दुर्भाग्यपूर्ण है परंतु यह चकित करने  वाली नही है विशेषकर जब एक नाबालिग लडकी हकूमत की ताकत का खामियाजा भुगतने के लिए विवश हो  ।

एस.के : क्या किसी के मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है ?

पी.आई. : कानूनी विधियों के अंतर्गत तथा उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार - नाबालिग लडकी के मानवाधिकारों का आरंभ से ही उल्लंघन किया जा रहा है । उसे घसीट कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया । किसी वकील या परिवार की और से कोई मदद नही लेने दी गई । बलप्रयोग करके पुरूष पुलिस ने उसके ब्यान दर्ज किए और उसकी पहचान बताते हुए व्यापक रूप से प्रचार किया । पुलिस ने सेना के साथ मिल कर उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है जिसकी जांच की जानी चाहिए एवं उनके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाना अनिवार्य है ।

एस.के : तो आप मानते हैं कि सेना  तभी से इसमें शामिल है जब से उसे नज़रबंद किया गया है ?

पी.आई. : सेना ने पुलिस द्वारा अवैध रूप से लिए गए उस लडकी के विडियो को अपने अधिकार में रखा और उसे प्रचारित किया । इसकी जांच की जानी अनिवार्य है कि क्या वह विडियो उनके निर्देशानुसार लिया गया था । तब तक हमें यह भ्रम रहेगा कि सेना इस परिस्थिति की निगरानी बडे ध्यान से कर रही थी और यह भी संभव है कि पुलिस और हकूमत को भी इस मामले में निर्देश दे रही हो । कश्‍मीर में कभी ऐसा नही सुना गया है जहां सेना की राय अक्सर अंतिम न मानी जाती हो ।

एस.के : आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुलिस सेना का बचाव कर रही है ?

पी.आई. : पुलिस अपना स्वंय का भी बचाव कर रही है क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने 12 अप्रैल 2016 से जिस प्रकार उस लडकी के साथ व्यवहार किया है उसके लिए उनकी जवाबदेही है  और इस कारण उनके विरूद्ध फौजदारी का मुकद्दमा भी चलाया जा सकता है । यह स्पष्ट है कि पुलिस ही सेना के हितों का भी पूरा ध्यान रख रही है ।

पुलिस उस लडकी को सबसे अलग करके उसके मनोबल को तोडने का हर संभव प्रयास कर रही है । वे नही चाहते कि वह बिना डर के कोई बात करे ।  वे चाहते हैं कि वह अपनी कानूनी लडाई को त्याग दे और उनके दबाव में आ कर उसने जो ब्यान दिए हैं उसे चुपचाप स्वीकार कर ले ।

एस.के : ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस सेना के हितों को ध्यान में रख कर कारवाई कर रही है । क्या यह असामान्य है ।

पी.आई. : जम्मू व कश्‍मीर की पुलिस अधिकतर हमेशा सशस्त्र बलों के उन जवानों का बचाव करती है जो यौन शोषण या अन्य अपराध करने के दोषी पाए जाते हैं । और यह भी सच है कि पुलिस स्वतंत्र नही है और उसे राजनैतिक एवं सेना के दबाव में रह कर ही काम करना होता है । मौजूदा मामले में वे स्वंय का भी बचाव करने की कौशिश कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने उस नाबालिग लडकी  के साथ गलत व्यवहार करके कानून का उल्लंघन किया है ।

एस.के : इस मामले के राजनितीकरण और तत्पश्चात हुई हिंसा के प्रभाव से क्या आपको इस मामले को संभालने में कोई कठिनाई हो रही है ?

पी.आई. : इस मामले में प्रासंगिक कानून के तहत हमारा पूरा ध्यान 16 वर्षीय नाबालिग लडकी और उसके हितों पर केंद्रित है । हमारे लिए यह सर्वप्रथम इंसानियत का मुद्दा है । एक नाबालिग लडकी इसकी शिकार है और उसका विडियो बना कर उसे प्रचारित करके परिवार की समाजिक रूप से बदनामी की गई है ।  उसका हित हमारी चिंता का प्राथमिक मुद्दा है ।

एस.के : क्या आप गोलीबारी के पीडितों के मामलों में भी शामिल होते हैं ?

पी.आई. : जम्मू व कश्‍मीर तथा सिविल सोसाइटी के गठबंधन के संलेखों में मुकदमेबाजी के अतिरिक्त मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले भी दर्ज हैं ।  यद्य्पि हत्या जैसे विषय बार एसोसिएशन की पीआइएल से संबंधित हैं अत: वह पहले से ही न्यायालय में पेश किए जा चुके हैं, ह्मारा काम  उन परिस्थितियों को ध्यान में रख कर मामले के दस्तावेज तैयार करना है जिनके तहत यह हत्याएं हुई हों ।

एस.के : आप क्या सोचते हैं कि इस मामले के दीर्घकालीन प्रभाव क्या हों सकते हैं ?

पी.आई. : 16 वर्षीय नाबालिग लडकी के मामले में जिस प्रकार पुलिस और सेना ने करवाई की है उससे तो यौन शोषण के अन्य मामलों में भी भयावह प्रभाव हो सकते हैं । अत: यह अत्याधिक महत्वपूर्ण है कि न्यायालय और न्यायालय के बाहर लोग गैर कानूनी ढंग से 16 वर्षीय नाबालिग लडकी के साथ की गई कारवाई के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं

एस.के : इस मामले को आप आदर्शरूप से किस प्रकार प्रकट करना चाहेगें ?

पी.आई. : कश्‍मीर में सबसे बडी कठिनाई अपराध की जांच करना और सच्चाई एवं न्याय की खोज  करना है । हकूमत स्वंय सच्चाई का मुह बंद करने का लगातार प्रयास करती रही है । अत:  मौजूदा मामले में उनका पहला प्रयास मामले की सच्चाई को प्रकट न होने देना है परंतु जिसे वह कानून एवं व्यवस्था कहते हैं उसे सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने लडकी के ब्यान अपनी सुविधानुसार दर्ज किए अर्थात स्थानीय समुदाय ने उस पर हमला किया और उसका बलात्कार किया । लडकी को तत्काल अपने परिवार तथा वकील से मिलने दिया जाना चाहिए था । उसका विडियो बना कर प्रसारित नही किया जाना चाहिए था । उसे पुलिस हिरासत में नही रखना चाहिए था । उसे अपने आप को  संभालने का समय दिया जाना चाहिए था और तत्पश्चात उसकी मर्जी से प्राथमिकी एवं उसके ब्यान मजिस्ट्रेट के सम्मुख दर्ज करके कारवाई की जानी चाहिए थी । इसकी बजाय पुलिस ने उसके साथ एक अपराधी कि तरह व्यवहार किया और उसे कारावास में बंद रखा तथा अपनी मर्जी से जो वह कहना चाहती थी उसे नही कहने दिया गया अपितु उसका मुंह बंद कर दिया गया ।

एस.के : यहां जो हुआ वह भारत के किसी भी कोने में होने वाली घटनाओं से किस प्रकार भिन्न है ?

पी.आई. : यौन शोषण तथा हकूमत का अनुचित रवैया विश्वव्यापी तथ्य है । परंतु भारत सरकार की सेना के अधिकृत जम्मू व कश्‍मीर के मामले में जहां सशस्त्र बलों  द्वारा किए गए किसी भी अपराध के लिए मुकदमा नही चलाया जाता, वहां पर प्रक्रिया विशेषकर बहुत ही दमनकारी है और ऐसे में हकूमत दण्ड मुक्ति के सभी उपाए करती है । कश्‍मीर में सशस्त्र बलों के विरूद्ध यौन शोषण के आरोपों से हकूमत बहुत ही सख्ती से निपटती है परंतु ऐसे में आरोपी के खिलाफ नही अपितु पीडित के खिलाफ कारवाई करती है ।

दुर्भाग्यवश हम कश्‍मीर में यह देखते हैं कि अपने सभी रूपों में मीडिया के कुछ अनुभागों सहित सरकार व गैर-सरकार एक साथ मिल कर सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि उन्हें किसी प्रकार से दण्ड मुक्ति मिल जाए । शायद अंतर स्तर एवं प्रबलता का है । कश्‍मीर में हकूमत के खिलाफ बोलना किसी के लिए भी आसान नही है । भारत के मामले में उदाहरण के लिए ज्ब निर्भय मामला हुअ था हमने सिविल सोसाइटी की उत्तेजना और मिडिया का सक्रिय आंदोलन देखा था । कश्‍मीर में परिणामों के डर से ऐसा नही हो पाता ।

एस.के : जब आप हकूमत की बात करते हैं तो क्या आप स्थानीय पुलिस, राज्य सरकार, केंद्रीय सरकार, न्यायपालिका, सेना सहित हकूमत के सभी स्तरों एवं शाखाओं को एक सामान मान कर बात करते हैं ?

पी.आई. : कश्‍मीर में अक्सर प्राधिकरणों के पक्ष में झुकाव पाया जाता है । विशेषकर जब बात सश्स्त्र बलों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन की हो तब ऐसा प्रतीत होता है कि हकूमत के विभिन्न पदाधिकारी सभी एक साथ मिल कर यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें किसी प्रकार से इससे छुटकारा मिल जाए । विभिन्न एजेंसियां इन्ही निर्धारित सिद्धांतों का अनुसरण करती हैं । यहां तक कि न्यायपालिका स्वतंत्र होते हुए भी दबाव में रह कर काम करती है ।

अनेकों मामले इस बात का प्रमाण हैं जहां हकूमत की विभिन्न शाखाओं ने दण्ड मुक्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी भूमिका निभाई है । यह हमेशा खुल्लमखुल्ला नही होता । अक्सर इसे परिष्कृत रूप से पेश किया जाता है । चाहे हकूमत की  ओर से यह राहत के रूप में हो या फिर किसी अन्य तरीके से हो, इसमें यह भी शामिल है कि न्याय प्रक्रिया को बुरी तरह से धीमा करके यह सुनिश्चित किया जाता है ताकि पीडित व्यक्ति पूरी तरह से कुंठित हो जाए । इस प्रकार परिस्थितियों से निपटते हुए हकूमत सशस्त्र बलों का बचाव करती है ।

एस.के : आप स्वतंत्र न्याय की किस प्रकार से आशा करते हैं जब हकूमत के सभी अवयवों की व्यूह रचना आपके खिलाफ है ?

पी.आई. : हमारी पहली प्राथमिकता उस लडकी को पुलिस हिरासत से बाहर निकालना है । इस महत्वपूर्ण प्रयास के बाद हम लडकी और उसके परिवार से मार्गदर्शन प्राप्त करके न्याय के लिए उनके भावी संघर्ष में साथ देंगे । यह केवल न्याय के लिए ही संघर्ष नही है अपितु यह सम्मान की लडाई भी है और यह तभी हो सकता है जब लोग इसके लिए अपनी आवाज उठाएं । यह मामला न केवल नाबालिग लडकी के लिए ही मह्त्वपूर्ण है अपितु यौन हिंसा के खिलाफ लडाई का भी है विशेषकर जब लडाई सशस्त्र बलों के जवानों, पुलिस और उनके खिलाफ हो जो हकूमत में पदाधिकारी हैं ।

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खुलासा : लेखक का संबंधी नाबालिग लडकी की प्रतिनिधि कानूनी टीम का सदस्य है ।

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