होम पोषण क्या नेस्ले लेबलिंग नियमों का उल्लंघन कर रही है ?

क्या नेस्ले लेबलिंग नियमों का उल्लंघन कर रही है ?

क्या नेस्ले लेबलिंग नियमों का उल्लंघन कर रही है ?
Photo: Marek Uliasz

आहार लेबल और उन्हें संचलित करने वाले नियम उपभोक्ताओं को उनकी खरीद में सहायता दिए जाने के लिए होते हैं । हम यदि भारतीय भोज के एक अत्याधिक आधारभूत घटक ष्ष्घीष्ष् की बात करें तो इसके बारे में जनता को पूरी जानकारी दिए जाने के प्रति भारतीय विनियमों के अंतर्गत की गई व्यवस्था में अनेकों झोल हैं । इसी तरह जनता को अपने उत्पादों के प्रति गुमराह न रखने के अपने खुद के लक्ष्य को शायद एक अत्यंत ही प्रख्यात ब्रांड ष्ष्नेस्लेष्ष् द्वारा नजरअंदाज भी किया जा रहा है ।
पैकेटबंद खाद्य सामग्री पर लगाए जाने वाले आहार लेबलों से उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिलती है कि उनके भीतर क्या है । न्यूनतम अनिवार्य प्रस्तुति के लिए आहार लेबलिंग नियमों के अंतर्गत नियम व्यवस्था उपलब्ध है और इसी से सूचना प्रस्तुति के संबंध में मानकीकृत प्रक्रिया तैयार होती है । इससे ब्रांड के संबंध में स्वास्थ्य एवं आहार दावों की जानकारी उपभोक्ताओं को मिल पाती है । घी में लगभग 100: वसा है अतरू घी के पैकेट पर लगाए जाने वाले लेबलों पर इससे संबंधित जानकारी साफ और स्पष्ट होनी चाहिए । तथापिए सैच्युरेटिडए अनसैच्युरेटिड अथवा ट्रांस.फैट के नाम से भी जानी जाने वाली हाइड्रोजेनेटिड वसा के रूप में खाद्य वसा का वर्गीकरण आगे किया जा सकता है । सैच्युरेटिड वसा के सेवन से रक्त में क्लोस्ट्रोल की मात्रा बढ़ती है तथा इससे हृदय रोग और आघात का खतरा बढ़ सकता है । और फिर किसी उत्पाद का पूर्णतरू वसा युक्त होने की स्थिति में वसा से संबंधित पूरी जानकारी दिया जाना औचित्यपरक तो है ही ।

भारत में वसा के घटकों की लेबलिंग के लिए विनियमों का निर्धारण भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण ;थ्ैै।प्द्ध द्वारा किया जाता है । वर्ष 2011 से लागू विद्यमान विनियमों के अंतर्गत उत्पाद में वसा की मात्रा अथवा स्वरूपों का उल्लेख किए जाने की स्थिति में वसा के स्वरूपों का विवरण दिया जाना अपेक्षित किया गया है । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पैकेट पर केवल वसा की कुल मात्रा ही दर्शाया जाना पर्याप्त है । इसके बावजूद भी कुछ ब्रांड वसा से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं । गुड़गांव स्थित एक स्थानीय सुपर बाजार में उपलब्ध छरू ब्रांडों के उत्पाद के लेबलों पर सैच्युरेटिव वसा और कैलेस्ट्रोल की मात्रा दर्शाई गई पाई गई जबकि नेस्ले सहित तीन अन्य ब्रांडों के लेबल पर यह जानकारी नहीं दी गई है ।

बाजार में उपलब्ध छरू ब्रांडों के उत्पाद के लेबलों पर सैच्युरेटिव वसा और कैलेस्ट्रोल की मात्रा दर्शाई गई है।
बाजार में उपलब्ध छरू ब्रांडों के उत्पाद के लेबलों पर सैच्युरेटिव वसा और कैलेस्ट्रोल की मात्रा दर्शाई गई है।

 

नेस्ले से सम्पर्क स्थापित कर जब मैंने उनसे यह जानना चाहा कि क्यों वे सैच्युरेटिड वसा की जानकारी नहीं देते हैं तो कम्पनी ने ई.मेल के माध्यम से यह उत्तर दिया कि श् नेस्ले घी भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा विर्निधारित लेबलिंग दिशानिर्देशों के अनुरूप हैश् । वसा से संबंधित जानकारी न देने वाले एक अन्य ब्रांड श्मदर डेयरीश् से भी मैंने सम्पर्क स्थापित किया तो मुझे ई-मेल के माध्यम से जो जानकारी दी गई उसमें यह भी लिखा था कि श्मदर डेयरी द्वारा भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) सहित सभी लागू अपेक्षाओं का अनुपालन किया जा रहा हैश् । भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) के दिनांक 17 दिसम्बरए 2014 के आदेश के अनुसार घी के लेबल पर ट्रांस . फैट एवं सैच्युरेटिड वसा की घोषणा को कार्यान्वित किए जाने की समय सीमा 31.12.2015 तक बढ़ा दी गई है तथा विनियमों का अनुपालन तदनुसार ही किया जा रहा है ।

गुड़गांव स्थित एक स्थानीय सुपरमार्किट में उपलब्ध तीन अन्य ब्रांडों के लेबल पर वसा या कैलेस्ट्रोल की प्रकार की जानकारी नहीं दी गई है ।
गुड़गांव स्थित एक स्थानीय सुपरमार्किट में उपलब्ध तीन अन्य ब्रांडों के लेबल पर वसा या कैलेस्ट्रोल की प्रकार की जानकारी नहीं दी गई है ।

 

वास्तविकता यह है कि भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा खाद्य तेलों और वसा के लेबलों पर ट्रांस एवं सैच्युरेटिड वसा की मात्रा दर्शाए जाने के उद्देश्य से एक संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था । जूनए 2013 से संशोधन को कार्यान्वयन करते हुए इसके अनुपालन के लिए निर्धारित समय सीमा को चार बार अर्थात सितम्बरए 2013 से दिसम्बरए2013 और उसके पश्चात 1 जुलाईए 2014 और फिर 1 जनवरीए 2015 और इसके पश्चात विद्यमान समय सीमा अर्थात 31 दिसम्बरए 2015 तक के लिए टाला जा चुका है । समय सीमा में किए गए इस विस्तार के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) के पास किसी प्रकार का विवेकसम्मत स्पष्टीकरण नहीं है ए परन्तु जब मैंने संजय गुप्ताए सहायक निदेशक ;प्रवर्तनद्ध तथा एसण् अनूपए सहायक निदेशक (प्रवर्तन) से इस बारे में बात की तो मुझे जवाब दिया गया कि श्हर कार्य में समय लगता हैए निश्चय ही उत्पादों पर लेबलिंग बदलने में भी समय लगेगा ही और इसी को ध्यान में रखते हुए हमने इसके लिए समय सीमा 31 दिसम्बरए 2015 तक के लिए बढ़ाई हैश् ।

नेस्ले का कहना है कि घी हमारी आहार.संबंधी अपेक्षाओं को पूरा करता है परंतु इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि घी में सैच्युरेटिड वसा और कैलेस्ट्रोल अधिक मात्रा में है ।
नेस्ले का कहना है कि घी हमारी आहार.संबंधी अपेक्षाओं को पूरा करता है परंतु इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि घी में सैच्युरेटिड वसा और कैलेस्ट्रोल अधिक मात्रा में है ।

नेस्ले का कहना है कि घी हमारी आहार.संबंधी अपेक्षाओं को पूरा करता है परंतु इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि घी में सैच्युरेटिड वसा और कैलेस्ट्रोल अधिक मात्रा में है ।विद्यमान विनियमों के अंतर्गत पोषण अथवा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी किसी पैकेज पर पोषक तत्वों का विवरण दिया जाना अपेक्षित किया गया है । ;नोट रू इससे तो अपने घी के बारे में श्विटामिन एए डीए ईए और के उत्तम स्रोतश् का दावा करने वाले अमूल पैकेट को अंतिम तीन विटामिनों की प्रमात्रा दर्शाना आवश्यक होगाद्ध अपने घी के पैकेट पर नेस्ले द्वारा यह पूछा गया है कि श्क्या वसा से बचाव करना फायदेमंद है घ्श् और आगे इसका उत्तर दिया गया है कि श्वसा से बचाव करना फायदेमंद नहीं है । किसी भी संतुलित आहार में शरीर की लगभग 30: ऊर्जा आवश्यकता वसा से ही पूरी होती है और घी से यह आवश्यकता पूरी होती है । श् मैंने भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) से यह जानना चाहा कि क्या इसे पोषण अथवा स्वास्थ्य के संबंध में किया गया दावा नहीं माना जा सकता । मुझे बताया गया कि वे भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) में आंतरिक विचार विमर्श के पश्चात इसका जवाब मुझे भेज देगें और 4 सप्ताह के पश्चात मुझे जो जवाब मिला उसमें 2011 के विनियमों का ही हवाला दिया हुआ था प्

नेस्ले का कहना है कि घी हमारी आहार.संबंधी अपेक्षाओं को पूरा करता है परंतु इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि घी में सैच्युरेटिड वसा और कैलेस्ट्रोल अधिक मात्रा में है ।भले ही भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) यह स्वीकार न करे कि नेस्ले द्वारा विनियमों का उल्लंघन किया जा रहा है अथवा नहीं परन्तु अपने उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यकारी पसंद के चयन में सहायता देने का दावा करने वाली नेस्ले द्वारा खुद अपने ही दावे का खंडन किया जा रहा है । सैच्युरेटिड वसा के संबंध में जारी अपने एक प्रोमोशनल पर्चे में नेस्ले ने यह दावा किया है कि श्सैच्युरेटिड वसा एवं पेय पदार्थों का कम प्रयोग किया जाना स्वास्थ्यप्रद आहार के लिए बेहतर हैश् । अपनी वेबसाईट पर कहीं नेस्ले द्वारा यह कहा गया है कि श्अपने उपभोक्ताओं को हम भोज्य पदार्थों के चयन के अच्छे अवसर प्रदान करना चाहते हैं और इसी के लिए खाद्य लेबल बनाए गए हैं जिनसे आपको पोषक एवं स्वास्थ्यप्रद खाद्य पदार्थों के चयन की सुविधा मिलती है ।श् तथापिए अपने घी पर सैच्युरेटिड वसा से संबंधित सूचना न दर्शाकर नेस्ले द्वारा अपने उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है ।

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